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गंगा सागर बाबा वैद्यनाथ धाम यात्रा

📍 1)बाबा बैधनाथ धाम ज्योतिर्लिंग, 2)गंगा सागर, 3)मां कामाख्या देवी मंदिर, 4)कोलकाता , 5)दक्षिणेश्वर काली घाट, 6)काली मंदिर, 7)भुनेश्वर, 8)कोणार्क मंदिर, 9)लिंगराज 10) श्री उमा महेश्वर मंदिर (गुवाहाटी), 11) जगरनाथ पूरी,12) बाबा वासुकीनाथ
बाबा बैद्यनाथ धाम ज्योतिर्लिंग गंगा सागर जगन्नाथ पुरी कामाख्या देवी गुवाहाटी उमानंद मंदिर कोलकाता का कालीघाट काली मंदिर दक्षिणेश्वर काली मंदिर
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Overview

Destinations: 

1)बाबा बैधनाथ धाम ज्योतिर्लिंग, 2) बाबा वासुकीनाथ, 3)गंगा सागर, 4) मां कामाख्या देवी मंदिर, 5)कोलकाता , 6)दक्षिणेश्वर काली घाट, 7)काली मंदिर, 8) भुनेश्वर, 9)कोणार्क मंदिर, 10)लिंगराज 11) श्री उमा महेश्वर मंदिर (गुवाहाटी), 12) जगरनाथ पूरी, 13)चंद्रभागा


Boarding Stations : Will Be Nearest Railway Junction. ( हमारे सभी यात्रियों के पास के रेलवे जंक्शन से सुविधा (all Station) उपलब्ध है। सभी राज्यों से।)

Bhopal Jn, Rani Kamlapati (Habibganj), Itarsi Jn, Jabalpur Jn, Katni Jn, Satna, Maihar, Sihora Road, Narsinghpur, Pipariya, Hoshangabad (Narmadapuram), Guna Jn, Ashok Nagar, Bina Jn, Vidisha, Ujjain Jn, Indore Jn, Dewas, Shujalpur, Sehore, Ratlam Jn, Nagda Jn, Khandwa Jn, Burhanpur, Betul, Amla Jn, Gwalior Jn, Morena, Anuppur 

Dropping Stations : To Your Nearest Railway Junction.

Bhopal Jn, Rani Kamlapati (Habibganj), Itarsi Jn, Jabalpur Jn, Katni Jn, Satna, Maihar, Sihora Road, Narsinghpur, Pipariya, Hoshangabad (Narmadapuram), Guna Jn, Ashok Nagar, Bina Jn, Vidisha, Ujjain Jn, Indore Jn, Dewas, Shujalpur, Sehore, Ratlam Jn, Nagda Jn, Khandwa Jn, Burhanpur, Betul, Amla Jn, Gwalior Jn, Morena, Anuppur 


Sleeper Price - ₹ 19,500.00

3ac Price - ₹ 31,500.00

2ac Price - ₹ 39,500.00


CALL FOR MORE INFORMATION :   9203775153//9203765153

Key Features
बाबा बैद्यनाथ धाम ज्योतिर्लिंग देवघर स्थित बाबा बैद्यनाथ धाम भगवान शिव के 9वें ज्योतिर्लिंग के रूप में जाना जाता है. ये एकमात्र मंदिर है जहां शिव और शक्ति दोनों एक साथ विराजमान हैं. भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है झारखंड के देवघर स्थित बाबा बैद्यनाथ धाम, द्वादश ज्योतिर्लिंगों में इसे 9वें ज्योतिर्लिंग के रूप में जाना जाता है. देवघर स्थित बैजनाथ धाम भगवान भोलेनाथ का एकमात्र मंदिर है. जहां शिव और शक्ति दोनों एक साथ विराजमान हैं इसलिए इसे शक्तिपीठ के नाम से भी जाना जाता है. मान्यताओं के मुताबिक बाबा बैद्यनाथ धाम में ही माता सती का हृदय कटकर गिरा था इसलिए इसे ही हृदयपीठ के रूप में भी जाना जाता है. देवघर स्थित विश्व प्रसिद्ध बैद्यनाथ मंदिर एकमात्र ऐसा मंदिर है जिसका जुड़ाव लंकापति दशानन रावण से है, रावण से जुड़ाव के कारण बैधनाथ धाम स्थित भगवान भोलेनाथ के शिवलिंग को रावणेश्वर बैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग के नाम से जाना जाता है.
गंगा सागर जब माता गंगा भगवान शिव की जटा से निकलकर पृथ्वी पर पहुंची थीं तब वह भागीरथ के पीछे-पीछे चलकर कपिल मुनि के आश्रम में जाकर सागर में मिल गई थीं। मां गंगा के पावन जल से राजा सागर के साठ हजार शापग्रस्त पुत्रों का उद्धार हुआ था। इस घटना की याद में तीर्थ गंगा सागर का नाम प्रसिद्ध हुआ।. 2) गंगासागर के समीप कपिल मुनि आश्रम बनाकर तपस्या करते थे। कपिल मुनि के भगवान विष्णु का अंश भी माना जाता है। कपिल मुनि के समय राजा सगर ने अश्वमेघ यज्ञ किया और इंद्र देव ने एक अश्व को चुराकर कपिल मुनि के आश्रम में बांध दिया। अश्वमेघ यज्ञ का अश्व चोरी हो जाने पर राजा ने अपने 60 हजार पुत्रों को उसकी खोज में लगा दिया। वे सभी खोजते-खोजते कपिल मुनि के आश्रम में जा पहुंचे और मुनि पर चोरी का आरोप लगाया। इससे क्रोधित होकर कपिल मुनि ने राजा सगर के सभी 60 हजार पुत्रों को जलाकर भस्म कर दिया। राजा सगर ने मुनि से पुत्रों के लिए क्षमा मांगी। कपिल मुनि ने कहा कि सभी पुत्रों को मोक्ष के लिए अब बस एक ही मार्ग बचा है, तुम स्वर्ग से गंगा को पृथ्वी पर लेकर आओ। राजा सगर के पोते राजकुमार अंशुमान ने प्रण लिया कि जब तक मां गंगा पृथ्वी पर नहीं आ जाती, तब तक इस वंश का कोई भी राजा चैन से नहीं बैठेगा। राजकुमार अंशुमान राजा बन गए और फिर उसके बाद राजा भागीरथ आए। राजा भागीरथ की तपस्या मां गंगा प्रसन्न हुईं और मकर संक्रांति के दिन पृथ्वी लोक पर आईं और कपिल मुनि के आश्रम पहुंचीं।
जगन्नाथ पुरी पुरी का जगन्नाथ धाम चार धामों में से एक है। यहां भगवान जगन्नाथ बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के साथ विराजते हैं। हिन्दुओं की प्राचीन और पवित्र 7 नगरियों में पुरी उड़ीसा राज्य के समुद्री तट पर बसा है। जगन्नाथ मंदिर विष्णु के 8वें अवतार श्रीकृष्ण को समर्पित है।
कामाख्या देवी गुवाहाटी जब माता गंगा भगवान शिव की जटा से निकलकर पृथ्वी पर पहुंची थीं तब वह भागीरथ के पीछे-पीछे चलकर कपिल मुनि के आश्रम में जाकर सागर में मिल गई थीं। मां गंगा के पावन जल से राजा सागर के साठ हजार शापग्रस्त पुत्रों का उद्धार हुआ था। इस घटना की याद में तीर्थ गंगा सागर का नाम प्रसिद्ध हुआ।. 2) गंगासागर के समीप कपिल मुनि आश्रम बनाकर तपस्या करते थे। कपिल मुनि के भगवान विष्णु का अंश भी माना जाता है। कपिल मुनि के समय राजा सगर ने अश्वमेघ यज्ञ किया और इंद्र देव ने एक अश्व को चुराकर कपिल मुनि के आश्रम में बांध दिया। अश्वमेघ यज्ञ का अश्व चोरी हो जाने पर राजा ने अपने 60 हजार पुत्रों को उसकी खोज में लगा दिया। वे सभी खोजते-खोजते कपिल मुनि के आश्रम में जा पहुंचे और मुनि पर चोरी का आरोप लगाया। इससे क्रोधित होकर कपिल मुनि ने राजा सगर के सभी 60 हजार पुत्रों को जलाकर भस्म कर दिया। राजा सगर ने मुनि से पुत्रों के लिए क्षमा मांगी। कपिल मुनि ने कहा कि सभी पुत्रों को मोक्ष के लिए अब बस एक ही मार्ग बचा है, तुम स्वर्ग से गंगा को पृथ्वी पर लेकर आओ। राजा सगर के पोते राजकुमार अंशुमान ने प्रण लिया कि जब तक मां गंगा पृथ्वी पर नहीं आ जाती, तब तक इस वंश का कोई भी राजा चैन से नहीं बैठेगा। राजकुमार अंशुमान राजा बन गए और फिर उसके बाद राजा भागीरथ आए। राजा भागीरथ की तपस्या मां गंगा प्रसन्न हुईं और मकर संक्रांति के दिन पृथ्वी लोक पर आईं और कपिल मुनि के आश्रम पहुंचीं।
उमानंद मंदिर गुवाहाटी, असम के उमानंद मंदिर को "उमा महेश्वर" मंदिर के रूप में भी जाना जाता है, जो ब्रह्मपुत्र नदी के बीच मयूर द्वीप पर स्थित है। अहोम राजा गदाधर सिंह के निर्देश पर 1694 ईस्वी में निर्मित, यह शिव मंदिर भस्मकूट पहाड़ी पर स्थित है। यह भगवान शिव और पार्वती को समर्पित है, जहाँ शिव के "उमानंद" रूप (आनंद देने वाले) की पूजा होती है। मान्यता है कि भगवान शिव ने पार्वती (उमा) के साथ रहने के लिए इस स्थान को चुना था, जिसके कारण इस मंदिर को उमा-महेश्वर कहा जाता है। यह मंदिर दुनिया के सबसे छोटे बसे हुए नदी द्वीप, मयूर द्वीप (पीकॉक आइलैंड) पर स्थित है, जिसे ब्रिटिश लोग 'ब्रिटिश आइलैंड' भी कहते थे।
कोलकाता का कालीघाट काली मंदिर कोलकाता का कालीघाट काली मंदिर हिंदू धर्म के 51 शक्तिपीठों में से एक अत्यंत पवित्र स्थल है। पौराणिक कथा के अनुसार, भगवान शिव द्वारा सती के पार्थिव शरीर के तांडव के समय यहाँ माता सती के दाहिने पैर का अंगूठा गिरा था। यह स्थान, जिसे माँ काली की प्रचंड शक्ति का निवास माना जाता है, भक्तों की मुरादें पूरी करने के लिए प्रसिद्ध है। मान्यता के अनुसार, यहाँ का मूल मंदिर काफी छोटा था। एक कथा के अनुसार, एक भक्त (भैरव) ने भगीरथ नदी से प्रकाश की किरणें निकलती देखीं और वहां माँ काली के चरणों का पत्थर पाया। वर्तमान मंदिर: मौजूदा मंदिर का निर्माण 1847 में शुरू हुआ और 1855 तक पूरा हुआ, जो मुख्य रूप से चौरंगागिरी नामक एक संत की तपस्या से जुड़ा है। 19वीं सदी में रानी रासमणि ने भी मां काली के दर्शन के बाद यहां पूजा की थी। मां काली का स्वरूप: मंदिर में स्थापित मूर्ति अद्वितीय है, जिसमें माँ काली की तीन बड़ी आँखें, चार हाथ और एक लंबी सोने की जीभ है। यहां कुष्ठ पत्थर से निर्मित मूर्ति की पूजा होती है।
दक्षिणेश्वर काली मंदिर रानी रासमणि का स्वप्न: 19वीं सदी में, रानी रासमणि, जो मां काली की अनन्य भक्त थीं, वाराणसी की यात्रा करने वाली थीं। लेकिन कहा जाता है कि यात्रा से एक रात पहले, उन्हें माता काली ने सपने में दर्शन दिए और कहा, "वाराणसी जाने की जरूरत नहीं है, मुझे गंगा के किनारे एक सुंदर मंदिर में स्थापित करो और मेरी पूजा करो"। मंदिर का निर्माण (1847-1855): स्वप्न के बाद, रानी रासमणि ने कोलकाता के पास दक्षिणेश्वर में हुगली नदी के तट पर एक जमीन खरीदी और 1847 में मंदिर का निर्माण शुरू कराया। यह मंदिर 1855 में बनकर तैयार हुआ। भवतारिणी रूप: मंदिर में माँ काली को 'भवतारिणी' (संसार से तारने वाली) के रूप में प्रतिष्ठित किया गया है, जो भगवान शिव के ऊपर विराजमान हैं। रामकृष्ण परमहंस से संबंध: इस मंदिर का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा रामकृष्ण परमहंस से जुड़ा है। वे इस मंदिर के पुजारी थे और माना जाता है कि उन्होंने यहीं पर अपनी कठोर साधना के बाद माता काली का साक्षात्कार किया था।
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TransportExcluded
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Meals
MealsInclude
BreakfastYes
LunchYes
DinnerYes

यात्रा में भोजन व्यवस्था 

ट्रेन के अंदर :  सुबह नाश, दोपहर भोजन एवं रात्रि भोजन

ट्रेन के बाहर : नाश्ता एवं रात्रि भोजन

✨ शुद्ध एवं उत्तम भोजन व्यवस्था

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